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मेरी कशमकश

  ना दिल की जबां से, ना मद्द- ए- खुदा से नाम लिखा तुम्हारा, ज़ख्मों के निशाँ से ना टूटे, ना बिखरे , ना चटके गुमा में नज़र हटाई तुमने , गिरे आसमां से   ना पार लगे हम , ना सागर ने, डूबाया यादों ने तुम्हारी , है शब भर जगाया मिले ना तुम , राह ढूंढ डाली सारी लगता है के फ़िर से, है तुमको, गवाया     ना महकी है खुशबू , ना रंगो के बादल है ना बिखरी है जुल्फें , ना ढलका सा आँचल है वक़्त जैसे अपना, थम ही गया है ना जी भर के रोए है, उखड़ा जैसे हर पल है   ना भूलें है तुमको , ना कभी चैन आया पाला हर ज़ख्म है , ना मरहम लगाया तुम आओ , ना आओ ये मर्ज़ी तुम्हारी ना रास्ता हमने देखा , ना नज़र को हटाया     ना दुःख मना ए दिल, क्या खोने का ग़म है ना काफिला कभी था , तन्हा, बेहतर हम है ये रंग है अनोखा, आज इसको लगाले ना चाह मंजिल की बाकी , जाने किस राह हम है   ना पतंगा बना , ना कभी जगमगाया हर रोल तुम्हारा , मैंने, खुद ही निभाया हर साँस है फिर भी, तुम्हारी मौजूदगी की गवां ना रुकने दी जिंदगी, ना धडकन ने कोई गीत ग...

विरह

  विरह तेरी तडपाए मुझे विरह में हरपल रोता रहूँ ना आस मिटे ना प्यास मिटे अश्कों से दामन भिगोता रहूँ ओ राधा मेरी , तू ना समझे तेरे प्यार में पागल होता रहूँ रहे सामने तू , धड़कन और बढे तेरे मिलन के, सपने संजोता रहूँ राधे मेरी , तू ना समझे तेरे प्यार में पागल होता रहूँ   ये रिश्ता कैसा निराला है मन से मोहित कर डाला है तेरी आस में हरदम, तू पास रहे जादू कैसा कर डाला है राधे मेरी , तू क्या समझे मैं सपनो में, तेरे खोता रहूँ विरह तेरी तडपाए मुझे विरह में तेरी , मैं रोता रहूँ   माया ने बिछाया, जाल नया ना उसको, ना तुझको आए दया ना द्वारिका की होली भाए मुझे मिल जाए, मन का मीत-सखा राधे, तू मन की रानी है कब तक मैं यूँ, समझोता करूँ   विरह तेरी, तडपाए मुझे विरह में तेरी, मैं रोता रहूँ     पल भर की ये, जिंदगानी है ना मिटनी अपनी, कहानी है हाँ, हारा तुझसे तेरा प्रियतम फागुन में होली मनानी है राधे मेरी , तू जीत गई तुझे अपने ही रंग में भिगोता रहूँ विरह तेरी तडपाए मुझे तेरे मिलन के, सपने संजोता रहूँ वि...

रंग

  रंग क्या है ये रंग क्यूँ चलते है अपने संग करते है हर पल सबको दंग रहते है सदा खुद में मलंग क्या है ये रंग क्यूँ चलते है अपने संग   कहीं खुशियों का रंग लाल है शरमाते कहीं दुल्हन के गाल है कहीं सफेद हुआ शमशान है कहीं काली बनी हुई दाल है कैसी मची है हरसू हुडदंग क्या है ये रंग क्यूँ चलते है अपने संग   अपना भारत सदा, रंग बिरंगा है     तीन रंग से बना, तिरंगा   है   छाती चौड़ी हो जाए, जब-जब ये लहराए छाती चौड़ी हो जाए, जब-जब ये लहराए जब वीर ओढे, रोती आकाशगंगा है जाने क्यूँ छिड़ती है, धरती पे जंग क्या है ये रंग क्यूँ चलते है अपने संग   क्या हरे रंग की हकदार, सिर्फ मज़ार है माँ की चूड़ी का भी, इस पर अधिकार है केसरी पर क्या, सिर्फ राम लिखा है निशानसाहिब पर भी, इसकी बहार है किसने बांटा इन्हें , किया कैसे रंग में भंग क्या है ये रंग क्यूँ चलते है अपने संग   अब थोड़ा प्यार मोहब्बत पर चलते है अब थोड़ा प्यार मोहब्बत पर चलते है देखे कैसे इनके भी रंग बदलते है शामें रंगीन हो जाती है प्यार में अ...

यादें

  शाम नूरानी, गाने लगी हलके से, मुस्कुराने लगी दिल में कैसे ज़स्बात उठे फ़िर याद किसी की , आने लगी   ये सफ़र तो था, तन्हाइंयों का इसकी कहानी, क्या कहिये खुद उधेढ़े मैंने, बुन बुन के सपनों में इसके, ना बहिये ना दिल तोडा, अपना किसी ने ना कारगार, कोई मरहम हुआ   रह रह कर फ़िर, इस दिल को रह रह कर फ़िर, इस दिल को याद किसकी, सताने लगी दिल में फ़िर ज़स्बात उठे फ़िर याद किसी की आने लगी   क्यूँ दिल को, बेहाल किया मन ही मन तो, मनाया था किस की राह, देख रहा है ये इस रस्ते कभी, ना कोई आया था मंजिल कैसी, है कैसा सफ़र ना मिला कोई, अनजाने में किसका साया है, कंधें पर जाने किससे मैं, कतराने लगी   दिल में फ़िर ज़स्बात उठे फ़िर याद किसी की आने लगी   आईना मुझसे, है पूछ रहा किसके जानिब, कोई सजदा करूँ लहू ज़िगर का, कहने लगा किसकी खातिर , और कैसे बहूँ किसी नज़र का नूर, जो मिल जाए मज़ा जाम सा हो , दवाखाने में कोहरा सा कैसा, छाने लगा तस्वीर मै किसकी, बनाने लगी   दिल में कैसे ज़स्बात उठे फ़िर याद किसी की आने लगी  ...

मेरे ज़स्बात

Hi everyone, hope you guys are keeping well. My today's creation is primarily for those who celebrate valentine on all the days of February and then for those who have left or planning to stay apart to carry on their own journeys, I wish you, All the best. Do well. May Krishna bless you.    कैसी होती है, किसी की काया क्यूँ बस, इसका मोल लगाया कैसी होगी, किसी की नियत कोई चेहरे से ना, समझ पाया   सोचा था, वो मेरा अपना है पर जैसे ये इक, सपना है वादा भी झूठा, था उसका क्यूँ झूठे वादों में, तपना है   माना, कल ही की, बात है वो अब भी , बिन बरसी बरसात है घने काले, बादल थे खाली किस बिसात पर, खाई मात है   वो अपने ही, सफर पर था मंजिल अपनी की, डगर पर था ना उसने थी, उम्मीद जगाई सपना मेरी ही, नज़र में था             क्या धोखा, मैंने खाया है मेरे बदले , क्या उसने पाया है ये सब, खेल है उपर वाले का कब कौन, ये समझ पाया है   ना जाने कैसा, सरूर है ये   कितना पालू , नासूर है ये अपनी मैं में...

तुम हो

मेरे दिल से , मेरी रूह में    बस बसे तुम हो मेरा होने की , ना होने की वजह तुम हो थे मेरे तुम भी अपने थी तुमसे ही मोहब्बत टूटा दिल जब ये जाना सपने झूठे थे वो बेबस    वजह तुम हो हाँ, वजह तुम हो मेरी आह की मेरी चाह की अब जुबां तुम हो मेरा होने की , ना होने की वजह तुम हो   कभी तो तेरी यादों के  किस्से चल जाते है कभी तो यूँ चलते चलते सपने मिल जाते है देखें तो साथ मेरे परछाई भी बहुत है अब बिन तेरे जीने को तन्हाई ही बहुत है वजह तुम हो हाँ, वजह तुम हो मेरे हसने का , मेरे रोने का सिलसिला तुम हो मेरा होने की , ना होने की वजह तुम हो   कभी तो सूनी साँसे मेरी तुझसे कतराती है कभी कभी बैचेनी मेरी तुमसे टकराती है तूने जो मुझको बांटे वो आँसू अब नहीं है तेरे संग थे जो काटे वो लम्हे अब नहीं है वजह तुम हो हाँ, वजह तुम हो मेरे बनने से मेरे बिखरने की दास्ताँ तुम हो मेरा होने की , ना होने की वजह तुम हो   श्यामिली    

प्रेम

Hellossss everyone, A very Happy Valentine week to all of you. Hope you, guys are enjoying your week. I just want to understand Whether it is a week of love, or you have love for a week. And imagine how things were going around before 20-25 years back, when valentine was not so common. People were in love, trust me, things were all ok. Rather better.    With no offences, I would like to represent Love from a different prospective. Hope you all will like it. वैलेंनटाइन की रीत बनाई सुध-बुध अपनी, गई बिसराई प्रेम की चलो, देखे परिभाषा प्रेम-रीत, सदा से चली आई   फूलों का खिलना, प्रेम है सूरज का ढलना, प्रेम है मीरा की आस, प्रेम है राधा का प्रयास, प्रेम है   मात पिता का प्रेम, वात्सल्य भाई बहन का प्रेम, अतुल्य कृष्ण सुदामा, सखा प्रेम का भाव लोक लाज भी, है प्रेम स्वभाव   वर्षो का अभ्यास, प्रेम है अपनों पर विश्वास, प्रेम है सीता माता बेदाग़, प्रेम है भीष्म का परित्याग, प्रेम है     शबरी की जूठन, राम ने खाई हिस्से लक्ष्मण के, संजीवनी आई धागा प्रेम का, था ऐसा बाधा ...