Posts

सबका वक्त आएगा

  कौन किसके साथ है कैसे कौन समझ पायेगा सबकी अपनी अपनी पारी है वो खुद को पार लगाएगा सब अपना अपना सोचेंगे जब सबका वक्त आएगा   आज वो उसकी टीम में है क्यूँ मेरा साथ निभाएगा टीम बदलने के साथ ज़ज्बात भी बदल जायेगा सब अपना अपना सोचेंगे जब सबका वक्त आएगा   क्या हार जीत का चक्कर है ये सब यहीं रह जायेगा क्या हार जीत के चक्कर में अपनो से मुंह फिरायेगा सब अपना अपना सोचेंगे जब सबका वक्त आएगा   आज साथ है , कल का नहीं भरोसा कल तू फिर पछतायेगा     खेल खत्म पैसा हज़म कल फिर से काम पर लग जायेगा कब तक अपना अपना सोचेंगा ये वक्त ना जाकर आएगा   श्यामिली

वक़्त वक़्त की बात है

  वो दोस्तों का मिलना हर बात पर खिलना बिन बात के ही रूठना बिन बात फिर बदलना सब वक़्त वक़्त की बात है   ना रंगे हुए चेहरे थे ना बिन बात के पहरे थे ना उसूल कोई था ज़रूरी रिश्ते एकदम गहरे थे आज फिर चाये पे मुलाकात है सब वक़्त वक़्त की बात है   बचपन में थी, जवानी की जल्दी जवानी आई, हुई कमाने के जल्दी यूँ भागदौड़ का हुआ सहारा जीने को थी जिंदगी , रही काटने की जल्दी ना कोई कमाई , ना कोई रिश्ता बचा खाली मेरे अब दोनों हाथ है सब वक़्त वक़्त की बात है   ना खबर कभी लगेगी, रहेगा कौन अपने साथ कुछ कहकर तो देखो , कई गिरेबान पे होगें हाथ ना ताल मिले कैसे मिल पाएंगे दिल हर चेहरा लेकर आएगा अपनी अपनी सौगात गौर से देखो , हैरान सारी काएनात है सब वक़्त वक़्त की बात है          श्यामिली

अपना जहाँ बुलंद है

क्या किसी की मर्ज़ी है किसको क्या पसंद है क्या उसने सोचा होगा क्या लगी लगन है   यही सोचने में अब अपना जहाँ बुलंद है   कहीं वो मुझको,  गलत ना समझे कहीं वो मुझको,  ना पहचाने कहीं ना माने,  मुझको दोषी करने लगे ना कहीं,   बहाने यहीं है अब,  कश्मकश मेरी    जिंदगी रहती,  यूँ ही तंग है यही सोचने में अब अपना जहाँ बुलंद है   वो बुलाये और,  ना जाऊं मै यही सोच सोच,  इतराऊँ मैं उसकी एक आहट,  सुनते ही हो जाती हूँ,  मलंग मैं जितने रूप,  उतने ही रंग देख गिरगिट भी,  हुई दंग है          यही सोचने में अब अपना जहाँ बुलंद है   चलूँ किस राह, किस राह,  मुड जाऊं मै   रहूँ उसके संग मै फिर तन्हा,  कैसे रह जाऊं मै वो है,  फिर भी नहीं है ये वज़ूद की,  कैसी जंग है   यही सोचने में अब अपना जहाँ बुलंद है   मै खुश तो हूँ, हूँ उदास कैसी   है अश्क इतने , फिर प्यास कैसी आँखे फिर,  धुली धुली है   मुस्कराहट फिर,  मंद मंद है यही सोचने में अब अ...

तेरी याद

ना कोई गम है ना ही फिर तन्हाई है ना किसी ने मुडके देखा ना भादो की ऋत आई है   फिर क्यूँ, दिल को बहलाने तेरी याद, चली आई है   ख़ामोशी के हरसू मैले है कहने को, तो हम , अकेले है हर ख्याल, दिल से यूँ खेले है ज़ख्मों की, झड़ी लग आई है ऐसे में, दिल को बहलाने तेरी याद, चली आई है   टूटी मैं, या सीखा नया छूटा तू, या बीता समा छटे बादल, जब आई हवा महोब्बत टूट कर, निखर आई है फिर क्यूँ, दिल को बहलाने तेरी याद, चली आई है   ये कैसा एहसास है समंदर में हूँ, पर प्यास है दो घड़ियाँ अब भी है , जो मेरे पास है यूँ तो, जिंदगी यूँ ही, गवाई है अब क्यूँ, दिल को बहलाने तेरी याद, चली आई है   ना लफ्ज़ बाकी, ना जाम है नाकामी का किस्सा, अब सरे आम है ख़बर है , गैरों में मेरा अब नाम है कितना बेरंग है धुआं, शायद चिठ्ठियों को आग लगाई है फिर क्यूँ, दिल को बहलाने तेरी याद, चली आई है         श्यामिली  

लीला

  उसने क्या कहा उसने क्या किया मैंने कुछ नहीं किया  मेरे साथ ये क्यूँ हुआ इतना सब क्यूँ सोचना है हम ने कितना जीना है छोडो सब जंजालों को क्यूँ तन्हा आँसू पीना है   हर रोम का अपना किस्सा है कहीं अहम, कही गुस्सा है आज, बीते कल का, हिस्सा है अपना ही खून पसीना है छोडो सब जंजालों को क्यूँ तन्हा आँसू पीना है   कुछ साथ रहेंगे, कुछ भूलेंगे कुछ अंतरमन को छू लेंगे कुछ को हम भी भूलें है ये समझ ही खुद, एक नगीना है छोडो सब जंजालों को क्यूँ तन्हा आँसू पीना है   हम कितने पुराने है खुद से ही अनजाने है मन अपने यूँ मैंले है कितने बरस, जाने जीना है छोडो सब जंजालों को क्यूँ तन्हा आँसू पीना है   खुल के जिओ, खुल के हसलो खुशियाँ बांटों, और खूब फलो क्या रख्खा तेरे मेरे में सब में गोविन्द है, जिससे भी मिलो है रूप भी वो, कुरूप भी वो बनाये भी वो, ढाए भी वो मिटटी का तू, इक खिलौना है किस बात पे चौडा, सीना है बस करले उसको, याद ज़रा उसकी ही, ये सब कुछ लीला है               ...

No looking back

  पलट पलट कर,  देखोगे मुझे सोचोगे इतना,  तो खोदोगे मुझे इक उम्र गुजारी है  राह तकने में तेरी अब भी ना आए तो,  ना मिलेंगे तुझे गहरी काली,  चाहे रात हो विरानियों का  बस साथ हो ना आएगी फिर, किसी की आहट चाहे, होठों में दबी,  कोई बात हो ना कोई फिर, सहारा होगा मैं यूं टूटा ,  ना टूटा कोई सितारा होगा ना तुम जो,  हमारे हुए  ना कोई अब,  तुम्हारा होगा जुबां जैसे  सिली सी है हसीं तेरी  गुमी सी है कराहने का  मन है मगर आह कब्र में  दबी सी है चाहे तू मिले अब, गर्दिश में चाहे तू पढ़े अब, आयेते ना लौट के  मैं अब आऊँगा चाहे करें सौ मिन्नतें अब जो करना सोच कर करना मेरी मानो इस बात से डरना मैं समय नहीं पर कम भी नहीं मेरे जाने के बाद मेरा इंतजार ना करना श्यामिली

नादान

Hare Krishna everyone, today I just tried to make my words more familiar to you all, that is on a super duper song, "Tujhse naraaz nahi zindagi ",  do let me know if you like it    तू है नादान, तुझे क्या पता दर्द है क्या, बेदर्द है तू तुझे क्या पता, ये अश्क है क्या आह में मेरी क्यूँ है तू,   तेरे लिए है क्या क्या किया साँसे भी बोझिल है अब तुझे क्या पड़ी उम्र गुज़रे ना ही कुछ हासिल है अब तेरी उम्मीद पे, छोड़ा था सबको मुझसे अब दूर हो गया है तू     तू है नादान, तुझे क्या पता दर्द है क्या, बेदर्द है तू हाँ  बेदर्द है तू   आएगा वो दिन खोने के बाद याद मेरी आएगी ना मिलेंगे हम जुदा हो कर तन्हाई तडपाएगी कितना अकेला होगा, कितना तनहा क्या करेगा अकेला होकर तू तू है नादान, तुझे क्या पता दर्द है क्या, बेदर्द है तू हाँ  बेदर्द है तू   तुझे क्या पता, ये अश्क है क्या आह में मेरी क्यूँ है तू, हाँ  बेदर्द है तू     श्यामिली